रायपुर: SIR प्रक्रिया पर भूपेश बघेल का बड़ा आरोप, बीएलओ को धमकाने की बात कही
रायपुर। छत्तीसगढ़ में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीति गर्माती जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मंगलवार को राजीव भवन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए चुनाव आयोग और भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
बीएलओ पर दबाव का आरोप
बघेल ने कहा कि SIR के दौरान बीएलओ को धमकाया और डराया जा रहा है। उन्होंने कहा—
“केंचुए के डसने से बीएलओ की मौत हो रही है, मतलब निर्वाचन आयोग के डसने से मौत हो रही है। भाजपा के गुंडे धमका रहे हैं।”
बघेल ने दावा किया कि कई जगह SIR फॉर्म अपलोड नहीं हो रहे हैं।
देवभोग में तीन घंटे में सिर्फ आठ फार्म जमा हुए हैं, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहा है।
बांग्लादेशी मुद्दे पर भी सरकार पर तंज
उन्होंने कहा कि सरकार SIR के जरिए बड़े पैमाने पर नाम काटने की तैयारी कर रही है और दावा किया कि इस प्रक्रिया के बहाने बांग्लादेशियों को बाहर करने की बात कही गई, लेकिन अब तक कोई आंकड़ा सामने नहीं आया है।
धान खरीदी पर सरकार को घेरा
धान खरीदी की समस्याओं पर बोलते हुए बघेल ने कहा—
“एग्रीटेक पोर्टल की वजह से हजारों किसानों का धान कट गया है। सर्वर डाउन है, किसान टोकन नहीं काट पा रहे। सरकार आदिवासी पट्टाधारी किसानों का धान नहीं खरीदेगी।”
जमीन दरों में बढ़ोतरी पर विरोध
सरकारी जमीन दरों में बढ़ोतरी को लेकर भी उन्होंने सरकार पर हमला बोला। बघेल ने कहा—
“कलेक्टर गाइडलाइन हमने कम किया था, इन्होंने बढ़ा दिया। मोतीपुर में जमीन 2 करोड़ प्रति एकड़ कर दी गई जबकि बाजार भाव 20-30 लाख है। अगर ऐसा चलता रहा तो छत्तीसगढ़ के बैंक खाली हो जाएंगे।”
उन्होंने बताया कि जमीन दरों में बढ़ोतरी के खिलाफ व्यापारियों ने दुर्ग में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का घेराव भी किया।
पीएम मोदी के दौरे पर टिप्पणी
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा—
“पीएम मोदी कई बार दौरा कर चुके हैं और मुख्यमंत्री की तारीफ इसलिए करते हैं ताकि अडानी-अंबानी को जमीन दी जाए। इनकी नजर कोयला खनिज बेचने पर है।”
घुसपैठ और सुरक्षा पर टिप्पणी
उन्होंने कहा कि SIR का फॉर्म उन्हें भी दिया गया जबकि उनकी बहू मतदान नहीं करती। उन्होंने आरोप लगाया कि गलत जांच की जा रही है।
“सीमा की सुरक्षा केंद्र की जिम्मेदारी है। भाजपा नेता खुद अपनी सरकार को निकम्मा साबित कर रहे हैं।”
छत्तीसगढ़ में SIR प्रक्रिया को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस जहां इसे मतदाता सूची से नाम हटाने की साजिश बता रही है, वहीं सरकार इसे पारदर्शी सुधार प्रक्रिया बता रही है।








