PM Awas Yojana Scam: गरियाबंद जिले में अधूरे आवासों का बड़ा खुलासा, हजारों लाभार्थी परेशान
गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) में चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां मंजूर हुए आवासों का निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया, जबकि कागजों में उन्हें पूरा दिखा दिया गया। प्रशासनिक जांच में सामने आया कि कई लाभार्थियों को आधा-अधूरा ढांचा खड़ा करके आवास पूरा होने की एंट्री कर दी गई।
30 प्रतिशत से भी कम काम पूरा, सूची में शामिल 3817 ग्रामीण
तहसील छुरा ब्लॉक के अंतर्गत 3817 लोगों का नाम आवास स्वीकृत सूची में शामिल किया गया था, लेकिन इनमें से कई को अभी तक पूरा घर नहीं मिला। ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें सिर्फ अधूरी दीवारें बनाकर या छत बिना ही आवास “पूरा” दिखा दिया गया।
इसके अलावा एक महीने पहले 30 प्रतिशत आवास अधूरे होने की सूचना पर जिला प्रशासन ने निरीक्षण किया, जिसके बाद कई अधिकारियों पर कार्रवाई की अनुशंसा की गई।
जांच में खुलासा: धाराशिव पंचायत में 40 से ज्यादा अधूरे घर
जनपद उपाध्यक्ष रमेश्वर नेताम ने बताया कि उनके क्षेत्र की सदरसींवा पंचायत में बड़ी संख्या में अधूरे घर मिले। लोगों ने बताया कि:
- किसी का आवास बिना छत के छोड़ दिया गया
- किसी का घर सिर्फ बेस और दीवार पर छोड़ दिया गया
- कई घरों में महीनों से काम बंद पड़ा है
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने बताया कि फरियाद के बावजूद अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की।
3700 से ज्यादा नाम लिस्ट में, लेकिन निर्माण पूरा नहीं
ग्रामीणों के अनुसार 3700 से अधिक आवास अधूरे हैं, जबकि सरकार के पोर्टल पर इन्हें “पूर्ण” दिखाया हुआ है। लाभार्थियों ने बताया कि मॉनिटरिंग के नाम पर सिर्फ औपचारिक जांच की जाती है।
जनप्रतिनिधियों ने आरोपियों पर कार्रवाई की मांग की
जनप्रतिनिधियों ने मीडिया से बात करते हुए कहा:
“सरकारी अफसर गाँव में आकर सिर्फ कागजी जांच कर चले जाते हैं। अधूरे घरों में लोग बरसात में रहने को मजबूर हैं।”
कलेक्टर ने टीम बनाकर जांच शुरू की
कलेक्टर कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, राजस्व और पंचायत विभाग की संयुक्त टीम जाँच कर रही है।
अधिकारियों ने कहा:
“जांच में दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।”
Conclusion
PM आवास योजना के नाम पर गरियाबंद जिले में बड़ा भ्रष्टाचार उजागर हुआ है। हजारों ग्रामीण अधूरे घरों में रहने को मजबूर हैं। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।








