छत्तीसगढ़ का बस्तर अब नशे की अवैध तस्करी का बड़ा ट्रांजिट हब बनता जा रहा है। उड़ीसा सीमा से लगे इलाकों, खासकर धनपुंजी बॉर्डर के जरिए गांजा और हशीश तेल की बड़े पैमाने पर सप्लाई लगातार जारी है। यह अवैध कारोबार बस्तर से निकलकर देश के बड़े महानगरों तक पहुंचता है, जहां इसकी कीमत करोड़ों रुपये तक पहुंच जाती है।तस्कर लगातार नए रास्तों और तरीकों का इस्तेमाल कर सीमा पार से नशा खपाने की कोशिश में लगे हैं। हालांकि बस्तर पुलिस भी इस नेटवर्क को तोड़ने के लिए लगातार सक्रिय है।
पुलिस और मुखबिर तंत्र की मदद से बीते डेढ़ साल में करीब 7 करोड़ रुपये के नशीले पदार्थ जब्त किए गए हैं। इस दौरान 200 से अधिक अंतर्राज्यीय तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।इसके बावजूद तस्करी का नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया है। पुलिस को बार-बार यह चुनौती मिल रही है कि तस्कर नए रूट और नए चेहरे के साथ फिर सक्रिय हो जाते हैं। कई मामलों में बस्तर पुलिस ने उड़ीसा पुलिस के साथ मिलकर संयुक्त कार्रवाई भी की है।
हाल ही में उड़ीसा-आंध्र प्रदेश सीमा पर हुई एक बड़ी रेड में करीब 200 करोड़ रुपये का गांजा और हशीश तेल जब्त किया गया, जिसने इस पूरे नेटवर्क की गहराई और विस्तार को उजागर कर दिया।फिलहाल स्थिति यह है कि अंतर्राज्यीय तस्करों का यह संगठित रैकेट अभी भी सक्रिय है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस सप्लाई चेन को जड़ से खत्म करने की है। जानकारों का मानना है कि इस पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए केंद्रीय स्तर पर एक विशेष टास्क फोर्स का गठन जरूरी हो गया है, जो राज्यों के बीच समन्वय बनाकर इस नेटवर्क पर निर्णायक कार्रवाई कर सके।








