कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एसईसीएल (SECL) और राजस्व विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों के मुआवजा घोटाले का बड़ा खुलासा हुआ है। खुशाल जायसवाल और राजेश जायसवाल सहित कई जिम्मेदार SECL अधिकारी अब जांच एजेंसियों के घेरे में आ गए हैं। CBI और ACB ने आर्थिक आपराधिक षड्यंत्र के मामले में FIR दर्ज कर ली है।
सूत्रों के अनुसार, यह घोटाला 3.44 करोड़ रुपए से अधिक का है, जबकि शिकायतों में कुल राशि 9 करोड़ रुपए से ज्यादा बताई जा रही है। बीते सप्ताह CBI की टीम ने ग्राम मलगांव और रलिया पहुंचकर जांच एवं पूछताछ की है।
कैसे रचा गया घोटाला?
जांच में सामने आया है कि सरकारी ज़मीन पर बने घरों को निजी संपत्ति बताकर फर्जी मुआवजा लिया गया।
खुशाल जायसवाल ने सरकारी भूमि पर बनाए गए घरों के नाम पर 1.60 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा प्राप्त किया।
इसी तरह मलगांव और अमगांव क्षेत्रों में परिवार और करीबियों के नाम पर 7 से ज्यादा बार 1.83 करोड़ से ज्यादा का मुआवजा क्लेम किया गया।
CBI–ACB जांच में बड़ा खुलासा
SECL अधिकारियों द्वारा मुआवज़ा तय करने से पहले संपत्ति का वैध सत्यापन नहीं किया गया, जबकि नियमानुसार:
- घर, कुएं, पेड़ आदि जैसी संरचनाएं नोटिफिकेशन के प्रकाशन से पहले बनी होना आवश्यक था,
- यह तिथि 2004, 2009 और 2010 के बीच निर्धारित थी।
लेकिन आरोप है कि बिना पात्रता सत्यापन के फर्जी निर्माण दिखाकर मुआवज़ा स्वीकृत किया गया।
किन धाराओं में दर्ज हुआ केस?
खुशाल जायसवाल, राजेश जायसवाल, अज्ञात SECL सार्वजनिक सेवकों और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है:
- IPC धारा 120-B / 420 (आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी)
- PC Act 1988 की धारा 13(1)(A) r/w 13(2) (संशोधित 2018)
CBI जांच जारी, कई अधिकारी रडार पर
घोटाले के चलते SECL प्रबंधन और राजस्व विभाग की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।
अनुमान है कि आने वाले दिनों में और नाम भी सामने आ सकते हैं तथा कई गिरफ्तारियाँ संभव हैं।








